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इलाहाबाद विश्वविद्यालय का सराहनीय कदम, कोविड -19 से माता-पिता को खो चुके बच्चों...

/Public Reporter
Posted : Thu/Jun 03, 2021, 10:49 AM - IST

दिल्ली / इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई पूरी कर चुके ऐसे बच्चों की आगे की शिक्षा का भार स्वयं वहन करने की घोषणा की है, जिनके माता-पिता का निधन कोरोना वायरस संक्रमण के कारण हो गया, ऐसे छात्र-छात्राएं अगर विश्वविद्यालय में अपना नामाकंन करवाते हैं तो उनकी पूरी फीस माफ की जाएगी। इलाहाबाद...

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By  Newssyn Team
posted : Thu/Apr 15, 2021, 03:28 AM - IST

New Delhi / देश में कोरोना... / नई दिल्ली/बोर्ड परीक्षाएं 2021 कोरोना महामारी के कारण सीबीएसई ने अपनी बोर्ड परीक्षाएं स्थगित की है। जिसके बाद राजस्थान और हिमाचल प्रदेश ने भी राज्य में होने वाली बोर्ड परीक्षाएं रद्द करने की घोषणा की है। इससे पहले एमपी, पंजाब, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तमिलनाडु जैसे राज्य भी फैसला ले चुके है।  नई दिल्ली सीबीएसई बोर्ड ने देश मे हो रहे कोरोना संक्रमण को मद्देनजर रखते हुए 10वीं की परीक्षा रद्द और 12वीं के परीक्षा को लेकर फैसला 1 जून के बाद होगा। लेकिन कोरोना के कारण  परीक्षाओं के शेड्यूल में बदलाव  करने वाले सीबीएसई पहला बोर्ड नही है। कई राज्य बोर्ड्स ने छात्रों को राहत देते हुए ऐसे फैसले लिए है।  महाराष्ट्र बोर्ड (Maharashtra Board) महाराष्ट्र ने भी कोरोन संक्रमण के बेकाबू हालात के मद्देनजर 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। महाराष्ट्र की शिक्षा मंत्री वर्षा गायकवाड परीक्षाएं स्थगित करने की घोषणा करते हुए कहा था कि हम स्वास्थ्य की स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा था कि कक्षा 12वीं की परीक्षाएं मई के अंत तक आयोजित की जाएंगी, जबकि 10वीं कक्षा की परीक्षाएं जून में होंगी। इन परीक्षाओं के लिए नए सिरे से तारीखों की घोषणा की जाएगी।  पंजाब बोर्ड (Punjab Board) बोर्ड परीक्षाएं स्थगित करने वाला पंजाब पहला राज्य था। पंजाब ने 12वीं की बोर्ड परीक्षा एक बार फिर स्थगित कर दी है। नई डेट शीट के अनुसार यह 20 अप्रैल से शुरू होनी थी। इसका आखिरी पेपर 24 अप्रैल को होना था। जबकि 04 मई से शुरू होने वाली 10वीं की परीक्षा पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने कहा है कि 10वीं की परीक्षा पर भी अगले दो-तीन दिन के भीतर फैसला लिया जाएगा। तमिलनाडु बोर्ड (Tamil Nadu Board) तमिलनाडु अभी तक संभवत: एक मात्र राज्य है जिसने 10वीं की परीक्षा रद्द कर दी है।  यहां नौंवी और 11वीं कक्षा की तरह 10वीं के छात्रों को भी बिना परीक्षा के पास किया जाएगा। हालांकि 12वीं की परीक्षा तीन मई से शुरू हो रही है। अभी तक इसे रद्द करने या टालने पर विचार नहीं किया गया है। छत्तीसगढ़ बोर्ड (Chhattisgarh Board) छत्तीसगढ़ में कोरोना महामारी के कारण 10वीं की परीक्षाएं टाल दी गई हैं। पहले यह 15 अप्रैल से शुरू होने वाली थीं। इसकी अभी तक नई तिथि घोषित नहीं की गई है। जबकि 12वीं की परीक्षा अपने निर्धारित कार्यक्रम मके अनुसार तीन मई से शुरू होकर 24 मई को संपन्न होगी।



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By  Newssyn Team
posted : Fri/Apr 09, 2021, 05:25 AM - IST

Mumbai / 8 राज्य- जहां बिना... / कोरोना की दूसरी लहर बोर्ड परीक्षाओं समेत अन्य तमाम परीक्षाओं पर बुरा साया बन रहा है। महाराष्ट्र, तमिलनाडु के साथ अनेक राज्यो में बिना परीक्षा के अगली कक्षाओं पे प्रमोट करने का फैसला किया है। अभी बोर्ड परीक्षा खासकर 12वी को लेकर किसी भी बोर्ड ने फैसला नही किया है। सीबीएससी, आईसीएसई समेत कई राज्य समते बोर्डों की परीक्षाएं सुरु होने में 22 से 25 दिन बाकी है।  किन राज्‍यों ने बिना परीक्षा किन कक्षओं को आगे प्रमोट करने का फैसला लिया है और कौन से राज्‍यों में कोरोना मरीजों के बढ़ने से परीक्षा टालने या रद्द करने की मांग तेज हुई है। महाराष्ट्र में कल तक 32,29,547 मामलों कु पृष्टि हुई है। यहा कोरोना का कहर देखते हुए महाराष्ट्र के राज्य शिक्षा मंर्ति वर्षा गायकवाड़ ने घोषणा की है कि राज्य में 9वी-11वी ने छात्र बैगेर परीक्षा के अगले क्लास में  प्रमोट किये जाएंगे शिक्षा बोर्ड के अनुसार covid-19 मामलो हो रही तेजी को देखते और मद्देनजर रहके हुए 9 और 11 अंतिम परीक्षा को रद्द कर दिया है। महाराष्ट्र के छात्रो को इस शैक्षणिक सत्र को 2021-22 के लिए प्रमोट किया गया HSC 12 वी  परीक्षाएं 23 अप्रेल से सुरु होने वाली है और कक्षा 10 वी की प्रैक्टिकल एग्जाम को रद्द कर दिया गया है। और covid-19  प्रभावित छात्रों की परीक्षा  में और जून में आयोजित की जाएंगी।  तमिलनाडु के सरकार ने एक माह पहिले ही फैसला ले लिया था की 9वी, 10वी, एवं 11वी की कक्षा के छात्र बिना परीक्षा के पास होंगे मुख्यमंत्री एडप्पादी पलानीस्वामी  ने विधानसभा में घोषणा की थी कि  2020-21 के शैक्षणिक वर्ष में इस कक्षाओं के लिए परीक्षा आयोजित नही होगी और छात्र सीधे पास कर दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था महामारी के कारण आई असामान्य स्थिति के चलते  शिक्षकों, अभिभावकों और छात्रों से  अनुरोध पर यह फैसला लिया गया  दिल्ली सरकार ने भी नर्सरी से लेकर 8वी के छात्रों को बिना किसी परीक्षा से अगली कक्षा में प्रमोट करने का फैसला लिया है। लेकिन कोरोना महामारी के बढ़ने से राज्य में अभीभावक 9वीं और 11वीं को भी प्रमोट करने की मांग कर रहे है। दिल्ली में कोरोना की बढ़ती रफ्तार को रोकने के लिए न नाईट कर्फ्यू लागू किया गया है।



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By  NIRAJ KUMAR...
posted : Tue/Mar 09, 2021, 08:58 AM - IST

Gaya / आने वाले वर्षों में... / दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय में नए सत्र (2020) में नामांकित छात्रो के स्वागत के लिए 09 मार्च को  विवेकानंद लेक्चर थिएटर में इंडक्शन प्रोग्राम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर हरिश चंद्र सिंह राठौर ने छात्रो का स्वागत किया और सम्बोधन किया। कुलपति ने कहा, " हमारा विश्वविद्यालय अपने 11वें वर्ष में ही देश के 48 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 26वां रैंक प्राप्त किया। यह बात सिद्ध करती है कि हम आने वाले वर्षों में देश के चुनिंदा विश्वविद्यालय में से एक होंगे। इसलिए जो भी छात्र देश के विभिन्न राज्यों से आये है, वो यहाँ के पढाई के गुणवत्ता को लेकर सुनिश्चित रहे।" विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रोफेसर आतिश पराशर ने छात्र कल्याण से जुड़ी सारी गतिविधियों और छात्रवृत्ति की जानकारी छात्रो की दी। साथ में उन्होंने कहा कि छात्रों के विकास के लिए छात्र कल्याण विभाग हमेशा प्रतिबद्ध है। विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर चीफ प्रोफेसर उमेश कुमार सिंह ने छात्रों को विश्वविद्यालय के अनुशासन और नियमों से अवगत कराया। शिक्षा विभाग के डीन प्रोफेसर कौशल किशोर ने छात्रों को चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम के बारे में छात्रों को समझाया और साथ में विश्वविद्यालय के परीक्षा पद्धति  से अवगत करवाया। कार्यक्रम के अंंत में डॉ कविता सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया.



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By  Public Reporter
posted : Tue/Feb 23, 2021, 11:03 AM - IST

Bilāspur / अटल बिहारी वाजपेयी... / छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में कुलपति के पद पर प्रो. अरण दिवाकर नाथ बाजपेयी (एडीएन बाजपेयी) की नियुक्ति की गई है। इसे लेकर सोमवार को राज्यपाल अनुसुईया उइके ने आदेश जारी किया है। अरण दिवाकर रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर (मध्य प्रदेश) में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। प्रोफेसर दिवाकर की नियुक्ति छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 (क्रमांक 22, सन 1973) की धारा 13 की उपधारा (1) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए की गई है। बाजपेयी का कार्यकाल, उपलब्धियां तथा सेवा शर्ते उक्त अधिनियम में वर्णित प्रावधान अनुसार होंगी। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में नए कुलपति की नियुक्ति को लेकर कई महीनों से प्रक्रिया जारी थी। इस दौरान राज्य के प्रमुख विश्वविद्यालयों सहित कॉलेज व यूटीडी से प्रोफेसरों की 84 अर्जी मिली थी। सोमवार को प्रो. बाजपेयी की नियुक्ति का आदेश जारी हो गया। प्रो. बाजपेयी इससे पहले अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा, महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय एवं हिमांचल प्रदेश विश्‍वविद्यालय, शिमला में दो बार कुलपति रह चुके हैं। उत्तरप्रदेश के शाहजहापुर में 21 सितंबर 1956 को दिवाकर नाथ का जन्म हुआ था। उनका मूल गाँव कलाम, जिला हरदोई उत्तर प्रदेश है। शाहजहापुर, पीलीभीत उत्तर प्रदेश के विभिन्न स्थानों और जिलों से उनकी स्कूली शिक्षा हुई । गोरखपुर विश्वविद्यालय, बहराइच उत्तर परदेश से बाजपेयी स्नातक है । प्रो. बाजपेयी  ने रादू विवि विश्वविद्यालय, जबलपुर से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर और डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी हासिल की है। वह वर्तमान में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में जबलपुर में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। बाजपेयी को कविता लेखन और योग पसंद है। इस अवसर पर रानी दुर्गावती विश्‍वविद्यालय, जबलपुर के कुलपति प्रो. कपिल देव मिश्र, प्रभारी कुलसचिव डॉ. दीपेश मिश्रा, प्रो. कमलेश मिश्रा, डॉ. लोकेश श्रीवास्तव एवं डॉ. आर के गुप्ता सहित विवि के प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों ने प्रो. बाजपेयी को हार्दिक बधाईयाँ  दीं।



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By  s verma
posted : Sat/Oct 31, 2020, 11:32 AM - IST

New Delhi / Education Materials... / Delhi: Realising the problems face by deaf children in pursuing education, the National Council of Educational Research and Training (NCERT) signed an agreement with the Indian Sign Language Research and Training Centre (ISLRTC) to prepare textbooks and other study materials in sign language. Availability of NCERT textbooks in Indian Sign Language (ISL) will enable the hearing-impaired children to access educational resources. Simultaneously, it will also prove a useful and much needed resource for teachers, teacher educators, parents and the hearing-impaired community. As per official sources, the cognitive skills of children are developed in the childhood and it is necessary to provide them with educational material in accordance with their learning needs. So far, hearing-impaired children used to study only through a verbal or written medium but after the signing of this MoU, they can study through a single Indian Sign Language also. It will not only enhance their vocabulary, but also enhance their capabilities to understand concepts. Indian Sign Language Research and Training Centre (ISLRTC) is an autonomous national institute of the social justice and empowerment ministry, which is dedicated to developing manpower for popularising the use of Indian Sign Language, teaching and conducting research.



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By  s verma
posted : Thu/Oct 15, 2020, 12:50 PM - IST

New Delhi / ट्यूशन फीस में कम... / पश्चिम बंगाल/कोलकाता, कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को 145 प्राइवेट स्कूलों को निर्देशित किया है कि उनके द्वारा ली जा रही ट्यूशन फीस को कम से कम 20 फीसदी की कटौती करें। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि ऑनलाइन कक्षाओं के चलते स्कूल उन सुविधाओं के लिए फीस नहीं ले सकते हैं जो छात्रों को नहीं मिल रही है। बता दें कि कोरोना महामारी के चलते कोलकाता के आसपास के 145 स्कूलों के छात्रों के अभिभावक स्कूल फीस में कटौती के लिए हाईकोर्ट में अर्जी डाली थी। कोर्ट ने अपने निर्देशों में कहा कि अप्रैल 2020 से लेकर स्कूल खुलने तक की अवधि के लिए फीस में कम से कम 20 फीसदी की कटौती किया जाना छत्रों के हित में होगा। साथ ही 2020-21 सत्र के फीस में भी बढ़ोत्तरी न करने का आदेश दिया गया। वित्तीय संकटों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने कहा कि विद्यालयों को इस ओर भी ध्यान देने की आवश्यकता है कि वह इस आपदा काल में फीस को कम करते हुए समाज को इस महामारी से लड़ने की ताकत देंगे। इस महामारी के कारण हर वर्ग वित्तीय संकटों का सामना कर रहा है। जिन अभिभावकों के द्वारा पहले ही फीस जमा कर दी गई थी, स्कूल प्रशासन उस अधिक दी गई राशि को आगे समायोजित करेगा।



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By  Public Reporter
posted : Tue/Oct 13, 2020, 02:23 AM - IST

New Delhi / यूजीसी की सजगता-... / दिल्ली, यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) ने बुधवार को देश के 24 फर्जी और गैर मान्यता प्राप्त संस्थानों की एक सूची जारी करते हुए इन संस्थानों को फर्जी करार दिया है। सूची के अनुसार इसमें सबसे ज्यादा फर्जी यूनिवर्सिटी उत्तर प्रदेश और उसके बाद राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में हैं।  यूजीसी के सचिव रजनीश जैन ने कहा कि वर्तमान में 24 फर्जी यूनिवर्सिटी और गैर मान्यता प्राप्त संस्थान यूजीसी कानून का उल्लंघन करते हुए चल रहे हैं। इन्हें फर्जी यूनिवर्सिटी/संस्थान घोषित किया गया है और इन्हें किसी भी तरह की कोई डिग्री प्रदान करने का अधिकार नहीं है। फर्जी विश्वविद्यालयों में उत्तर प्रदेश, राजधानी दिल्ली, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, पुडुचेरी और महाराष्ट्र।   उत्तर प्रदेश के फर्जी विश्वविद्यालय गांधी हिंदी विद्यापीठ, प्रयाग वारणसेय संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी महिला ग्राम विद्यापीठ/विश्वविद्यालय, प्रयाग उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय, कोसी कलां, मथुरा नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ इलेक्ट्रोकॉमप्लेक्स होम्योपैथी, कानपुर महाराणा प्रताप शिक्षा निकेतन विश्वविद्यालय, प्रतापगढ़ नेताजी सुभाष चंद्र बोस यूनिवर्सिटी (ओपन यूनिवर्सिटी), अलीगढ़ इंद्रप्रस्थ शिक्षा परिषद, इंस्टीट्यूशनल एरिया, माकनपुर, नोएडा   राजधानी दिल्ली के फर्जी विश्वविद्यालय वॉकेशनल यूनिवर्सिटी, दिल्ली कमर्शियल यूनिवर्सिटी लिमिटेड, दरियागंज आध्यात्मिक विश्वविद्यालय, रोहिणी विश्वकर्मा ओपन यूनिवर्सिटी फॉर सेल्फ एमप्लॉयमेंट, दिल्ली यूनाइटेड नेशन्स यूनिवर्सिटी, दिल्ली एडीआर-सेंट्रिक जूरीडीकल यूनिवर्सिटी, राजेंद्र प्लेस   पश्चिम बंगाल इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन, कोलकाता  इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन एंड रिसर्च, कोलकाता   केरल सेंट जॉन यूनिवर्सिटी कृष्णाटम, केरल   महाराष्ट्र राजा अरेबिक यूनिवर्सिटी, नागपुर   ओडिशा नॉर्थ ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, मयूरभंज नवभारत शिक्षा परिषद, राउरकेला   कर्नाटक बडागानवी सरकार वर्ल्ड ओपन यूनिवर्सिटी एजुकेशन सोसायटी, बेलगाम   पुडुचेरी श्री बोधि एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन    आंध्र प्रदेश क्राइस्ट न्यू टेस्टामेंट डीम्ड यूनिवर्सिटी, गुंटूर



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By  Maahi Newser
posted : Thu/Jan 01, 1970, 05:30 AM - IST

New Delhi / जानिए नई शिक्षा... / नई शिक्षा नीति सरकार द्वारा शिक्षा को लेकर की जाने वाली नए बदलाओं से है जिसमें देश में शिक्षा को लेकर आने वाले समय को लेकर विज़न तैयार करना एवं उसे लागू करना है। जानकारों के अनुसार हर दस से पंद्रह साल में ऐसी नीति बनाई जानी चाहिए परंतु इस बार नई शिक्षा नीति को बनने में 34 साल लग गए। देश में सबसे पहली शिक्षा नीति सन 1968 में इंदिरा गांधी द्वारा शुरू की गई थी। भारत में नई शिक्षा नीति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट से मंजूरी 29 जुलाई, 2020 को मिली। इसमें पाँचवी तक की शिक्षा मातृभाषा में होगी। इस नई नीति में शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद का छः प्रतिशत भाग खर्च किया जाएगा। केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए साल 2030 तक का लक्ष्य रखा है। आइये जानते हैं नई शिक्षा नीति 2020 में शामिल मुख्य बिन्दुओं के बारे में- अब 1 से लेकर पाँचवी तक की शिक्षा स्थानीय भाषा या मात्रभाषा में होगी। इसमें अँग्रेजी, हिन्दी जैसी विषय शामिल होंगे परंतु पाठ्यक्रम स्थानीय भाषा या मातृभाषा में होंगे। नई शिक्षा नीति 2020 में सकल घरेलू उत्पाद का छः प्रतिशत खर्च किए जाएंगे जबकि यह पहले केवल 4.43 प्रतिशत थी। देश में चलने वाली 10+2 पद्धति में बदलाव होगा। नई नीति में ये 5+3+3+4 के हिसाब से होगा जिसमें 5 का मतलब है तीन साल प्री स्कूल और कक्षा-1 और कक्षा-2, 3 का मतलब है कक्षा-3, 4 और 5, अगले 3 का मतलब है कक्षा6, 7 और 8 तथा अंतिम के 4 का मतलब है कक्षा-9, 10, 11 और 12। मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है। रमेश पोखरियाल निशंक अब देश के शिक्षा मंत्री हैं। बोर्ड परीक्षाओं में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन इन्हें ज्ञान आधारित बनाया जाएगा। लॉ और मेडिकल एजुकेशन को छोड़कर अन्य समस्त उच्च शिक्षा के लिए एकल निकाय के रूप में भारत उच्च शिक्षा आयोग यानि HECI का गठन किया जाएगा. अर्थात उच्च शिक्षा के लिए एक सिंगल रेगुलेटर रहेगा. नई शिक्षा नीति में रिपोर्ट कार्ड तैयार करने के तीन हिस्से होंगे. जिसमें पहले बच्चा अपने बारे में स्वयं मूल्यांकन करेगा, दूसरा उसके सहपाठियों से होगा और तीसरा अध्यापक के जरिए। अंडर ग्रेजुएट कोर्स को अब 3 की बजाए 4 साल का कर दिया गया है। छात्र अभी भी 3 साल बाद डिग्री हासिल कर पाएंगे, लेकिन 4 साल का कोर्स करने पर, सिर्फ 1 साल में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की जा सकेंगी. 3 साल की डिग्री उन छात्रों के लिए, जिन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं करना है. कक्षा छः से ही छात्रों को कोडिंग भी पढ़ाई जाएगी, जो कि स्कूली शिक्षा पूरी करने तक उनके कौशल विकास में सहायक होगी। इसके लिए इच्छुक छात्रों को छठवीं कक्षा के बाद से ही इंटर्नशिप करायी जाएगी. म्यूज़िक और आर्ट्स को पाठयक्रम में शामिल किया जायेगा। ग्रेजुएशन कोर्स के तीनों साल को प्रभावी बनाने हेतु उत्तम कदम उठाया गया है जिसके तहत 1 साल बाद सर्टिफिकेट, 2 साल बाद डिप्लोमा और 3 साल बाद डिग्री हासिल की जा सकेगी। ई-पाठ्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक टेक्नोलॉजी फोरम यानि NETF बनाया जा रहा है जिसके लिए वर्चुअल लैब विकसित की जा रहीं हैं। MPhil को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है, अब MA के बाद छात्र सीधे PhD कर पाएंगे। नई शिक्षा नीति में सबसे महत्वपूर्ण बिन्दु है मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम का लागू होना। इसके तहत 1 साल के बाद पढ़ाई छोडने पर सर्टिफिकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा और तीन-चार साल के बाद पढ़ाई छोडने के बाद डिग्री मिल जाएगी। नई शिक्षा नीति 2020 में प्राइवेट यूनिवर्सिटी और गवर्नमेंट यूनिवर्सिटी के नियम अब एक होंगे। देश में अनुसन्धान को बढ़ावा देने के लिए शीर्ष निकाय के रूप में नेशनल रिसर्च फ़ाउंडेशन (NRF) की स्थापना की जाएगी। यह स्वतंत्र रूप से सरकार के द्वारा, एक बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स द्वारा शासित होगा और बड़े प्रोजेक्टों की फाइनेंसिंग भी करेगा। नई नीति स्कूलों और एचईएस दोनों में बहुभाषावाद को बढ़ावा देती है. राष्ट्रीय पाली संस्थान, फारसी और प्राकृत, भारतीय अनुवाद संस्थान और व्याख्या की स्थापना की जाएगी।



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By  Maahi Newser
posted : Thu/Aug 20, 2020, 09:56 AM - IST

New Delhi / जानिए नई शिक्षा... / नई शिक्षा नीति सरकार द्वारा शिक्षा को लेकर की जाने वाली नए बदलाओं से है जिसमें देश में शिक्षा को लेकर आने वाले समय को लेकर विज़न तैयार करना एवं उसे लागू करना है। जानकारों के अनुसार हर दस से पंद्रह साल में ऐसी नीति बनाई जानी चाहिए परंतु इस बार नई शिक्षा नीति को बनने में 34 साल लग गए। देश में सबसे पहली शिक्षा नीति सन 1968 में इंदिरा गांधी द्वारा शुरू की गई थी। भारत में नई शिक्षा नीति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट से मंजूरी 29 जुलाई, 2020 को मिली। इसमें पाँचवी तक की शिक्षा मातृभाषा में होगी। इस नई नीति में शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद का छः प्रतिशत भाग खर्च किया जाएगा। केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए साल 2030 तक का लक्ष्य रखा है। आइये जानते हैं नई शिक्षा नीति 2020 में शामिल मुख्य बिन्दुओं के बारे में- अब 1 से लेकर पाँचवी तक की शिक्षा स्थानीय भाषा या मात्रभाषा में होगी। इसमें अँग्रेजी, हिन्दी जैसी विषय शामिल होंगे परंतु पाठ्यक्रम स्थानीय भाषा या मातृभाषा में होंगे। नई शिक्षा नीति 2020 में सकल घरेलू उत्पाद का छः प्रतिशत खर्च किए जाएंगे जबकि यह पहले केवल 4.43 प्रतिशत थी। देश में चलने वाली 10+2 पद्धति में बदलाव होगा। नई नीति में ये 5+3+3+4 के हिसाब से होगा जिसमें 5 का मतलब है तीन साल प्री स्कूल और कक्षा-1 और कक्षा-2, 3 का मतलब है कक्षा-3, 4 और 5, अगले 3 का मतलब है कक्षा6, 7 और 8 तथा अंतिम के 4 का मतलब है कक्षा-9, 10, 11 और 12। मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है। रमेश पोखरियाल निशंक अब देश के शिक्षा मंत्री हैं। बोर्ड परीक्षाओं में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन इन्हें ज्ञान आधारित बनाया जाएगा। लॉ और मेडिकल एजुकेशन को छोड़कर अन्य समस्त उच्च शिक्षा के लिए एकल निकाय के रूप में भारत उच्च शिक्षा आयोग यानि HECI का गठन किया जाएगा. अर्थात उच्च शिक्षा के लिए एक सिंगल रेगुलेटर रहेगा. नई शिक्षा नीति में रिपोर्ट कार्ड तैयार करने के तीन हिस्से होंगे. जिसमें पहले बच्चा अपने बारे में स्वयं मूल्यांकन करेगा, दूसरा उसके सहपाठियों से होगा और तीसरा अध्यापक के जरिए। अंडर ग्रेजुएट कोर्स को अब 3 की बजाए 4 साल का कर दिया गया है। छात्र अभी भी 3 साल बाद डिग्री हासिल कर पाएंगे, लेकिन 4 साल का कोर्स करने पर, सिर्फ 1 साल में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की जा सकेंगी. 3 साल की डिग्री उन छात्रों के लिए, जिन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं करना है. कक्षा छः से ही छात्रों को कोडिंग भी पढ़ाई जाएगी, जो कि स्कूली शिक्षा पूरी करने तक उनके कौशल विकास में सहायक होगी। इसके लिए इच्छुक छात्रों को छठवीं कक्षा के बाद से ही इंटर्नशिप करायी जाएगी. म्यूज़िक और आर्ट्स को पाठयक्रम में शामिल किया जायेगा। ग्रेजुएशन कोर्स के तीनों साल को प्रभावी बनाने हेतु उत्तम कदम उठाया गया है जिसके तहत 1 साल बाद सर्टिफिकेट, 2 साल बाद डिप्लोमा और 3 साल बाद डिग्री हासिल की जा सकेगी। ई-पाठ्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक टेक्नोलॉजी फोरम यानि NETF बनाया जा रहा है जिसके लिए वर्चुअल लैब विकसित की जा रहीं हैं। MPhil को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है, अब MA के बाद छात्र सीधे PhD कर पाएंगे। नई शिक्षा नीति में सबसे महत्वपूर्ण बिन्दु है मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम का लागू होना। इसके तहत 1 साल के बाद पढ़ाई छोडने पर सर्टिफिकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा और तीन-चार साल के बाद पढ़ाई छोडने के बाद डिग्री मिल जाएगी। नई शिक्षा नीति 2020 में प्राइवेट यूनिवर्सिटी और गवर्नमेंट यूनिवर्सिटी के नियम अब एक होंगे। देश में अनुसन्धान को बढ़ावा देने के लिए शीर्ष निकाय के रूप में नेशनल रिसर्च फ़ाउंडेशन (NRF) की स्थापना की जाएगी। यह स्वतंत्र रूप से सरकार के द्वारा, एक बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स द्वारा शासित होगा और बड़े प्रोजेक्टों की फाइनेंसिंग भी करेगा। नई नीति स्कूलों और एचईएस दोनों में बहुभाषावाद को बढ़ावा देती है. राष्ट्रीय पाली संस्थान, फारसी और प्राकृत, भारतीय अनुवाद संस्थान और व्याख्या की स्थापना की जाएगी।



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By  Maahi Newser
posted : Thu/Aug 20, 2020, 09:56 AM - IST

New Delhi / जानिए नई शिक्षा... / नई शिक्षा नीति सरकार द्वारा शिक्षा को लेकर की जाने वाली नए बदलाओं से है जिसमें देश में शिक्षा को लेकर आने वाले समय को लेकर विज़न तैयार करना एवं उसे लागू करना है। जानकारों के अनुसार हर दस से पंद्रह साल में ऐसी नीति बनाई जानी चाहिए परंतु इस बार नई शिक्षा नीति को बनने में 34 साल लग गए। देश में सबसे पहली शिक्षा नीति सन 1968 में इंदिरा गांधी द्वारा शुरू की गई थी। भारत में नई शिक्षा नीति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट से मंजूरी 29 जुलाई, 2020 को मिली। इसमें पाँचवी तक की शिक्षा मातृभाषा में होगी। इस नई नीति में शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद का छः प्रतिशत भाग खर्च किया जाएगा। केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए साल 2030 तक का लक्ष्य रखा है। आइये जानते हैं नई शिक्षा नीति 2020 में शामिल मुख्य बिन्दुओं के बारे में- अब 1 से लेकर पाँचवी तक की शिक्षा स्थानीय भाषा या मात्रभाषा में होगी। इसमें अँग्रेजी, हिन्दी जैसी विषय शामिल होंगे परंतु पाठ्यक्रम स्थानीय भाषा या मातृभाषा में होंगे। नई शिक्षा नीति 2020 में सकल घरेलू उत्पाद का छः प्रतिशत खर्च किए जाएंगे जबकि यह पहले केवल 4.43 प्रतिशत थी। देश में चलने वाली 10+2 पद्धति में बदलाव होगा। नई नीति में ये 5+3+3+4 के हिसाब से होगा जिसमें 5 का मतलब है तीन साल प्री स्कूल और कक्षा-1 और कक्षा-2, 3 का मतलब है कक्षा-3, 4 और 5, अगले 3 का मतलब है कक्षा6, 7 और 8 तथा अंतिम के 4 का मतलब है कक्षा-9, 10, 11 और 12। मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है। रमेश पोखरियाल निशंक अब देश के शिक्षा मंत्री हैं। बोर्ड परीक्षाओं में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन इन्हें ज्ञान आधारित बनाया जाएगा। लॉ और मेडिकल एजुकेशन को छोड़कर अन्य समस्त उच्च शिक्षा के लिए एकल निकाय के रूप में भारत उच्च शिक्षा आयोग यानि HECI का गठन किया जाएगा. अर्थात उच्च शिक्षा के लिए एक सिंगल रेगुलेटर रहेगा. नई शिक्षा नीति में रिपोर्ट कार्ड तैयार करने के तीन हिस्से होंगे. जिसमें पहले बच्चा अपने बारे में स्वयं मूल्यांकन करेगा, दूसरा उसके सहपाठियों से होगा और तीसरा अध्यापक के जरिए। अंडर ग्रेजुएट कोर्स को अब 3 की बजाए 4 साल का कर दिया गया है। छात्र अभी भी 3 साल बाद डिग्री हासिल कर पाएंगे, लेकिन 4 साल का कोर्स करने पर, सिर्फ 1 साल में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की जा सकेंगी. 3 साल की डिग्री उन छात्रों के लिए, जिन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं करना है. कक्षा छः से ही छात्रों को कोडिंग भी पढ़ाई जाएगी, जो कि स्कूली शिक्षा पूरी करने तक उनके कौशल विकास में सहायक होगी। इसके लिए इच्छुक छात्रों को छठवीं कक्षा के बाद से ही इंटर्नशिप करायी जाएगी. म्यूज़िक और आर्ट्स को पाठयक्रम में शामिल किया जायेगा। ग्रेजुएशन कोर्स के तीनों साल को प्रभावी बनाने हेतु उत्तम कदम उठाया गया है जिसके तहत 1 साल बाद सर्टिफिकेट, 2 साल बाद डिप्लोमा और 3 साल बाद डिग्री हासिल की जा सकेगी। ई-पाठ्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक टेक्नोलॉजी फोरम यानि NETF बनाया जा रहा है जिसके लिए वर्चुअल लैब विकसित की जा रहीं हैं। MPhil को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है, अब MA के बाद छात्र सीधे PhD कर पाएंगे। नई शिक्षा नीति में सबसे महत्वपूर्ण बिन्दु है मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम का लागू होना। इसके तहत 1 साल के बाद पढ़ाई छोडने पर सर्टिफिकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा और तीन-चार साल के बाद पढ़ाई छोडने के बाद डिग्री मिल जाएगी। नई शिक्षा नीति 2020 में प्राइवेट यूनिवर्सिटी और गवर्नमेंट यूनिवर्सिटी के नियम अब एक होंगे। देश में अनुसन्धान को बढ़ावा देने के लिए शीर्ष निकाय के रूप में नेशनल रिसर्च फ़ाउंडेशन (NRF) की स्थापना की जाएगी। यह स्वतंत्र रूप से सरकार के द्वारा, एक बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स द्वारा शासित होगा और बड़े प्रोजेक्टों की फाइनेंसिंग भी करेगा। नई नीति स्कूलों और एचईएस दोनों में बहुभाषावाद को बढ़ावा देती है. राष्ट्रीय पाली संस्थान, फारसी और प्राकृत, भारतीय अनुवाद संस्थान और व्याख्या की स्थापना की जाएगी।



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By  Maahi Newser
posted : Thu/Jan 01, 1970, 05:30 AM - IST

New Delhi / जानिए नई शिक्षा... / नई शिक्षा नीति सरकार द्वारा शिक्षा को लेकर की जाने वाली नए बदलाओं से है जिसमें देश में शिक्षा को लेकर आने वाले समय को लेकर विज़न तैयार करना एवं उसे लागू करना है। जानकारों के अनुसार हर दस से पंद्रह साल में ऐसी नीति बनाई जानी चाहिए परंतु इस बार नई शिक्षा नीति को बनने में 34 साल लग गए। देश में सबसे पहली शिक्षा नीति सन 1968 में इंदिरा गांधी द्वारा शुरू की गई थी। भारत में नई शिक्षा नीति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट से मंजूरी 29 जुलाई, 2020 को मिली। इसमें पाँचवी तक की शिक्षा मातृभाषा में होगी। इस नई नीति में शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद का छः प्रतिशत भाग खर्च किया जाएगा। केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए साल 2030 तक का लक्ष्य रखा है। आइये जानते हैं नई शिक्षा नीति 2020 में शामिल मुख्य बिन्दुओं के बारे में- अब 1 से लेकर पाँचवी तक की शिक्षा स्थानीय भाषा या मात्रभाषा में होगी। इसमें अँग्रेजी, हिन्दी जैसी विषय शामिल होंगे परंतु पाठ्यक्रम स्थानीय भाषा या मातृभाषा में होंगे। नई शिक्षा नीति 2020 में सकल घरेलू उत्पाद का छः प्रतिशत खर्च किए जाएंगे जबकि यह पहले केवल 4.43 प्रतिशत थी। देश में चलने वाली 10+2 पद्धति में बदलाव होगा। नई नीति में ये 5+3+3+4 के हिसाब से होगा जिसमें 5 का मतलब है तीन साल प्री स्कूल और कक्षा-1 और कक्षा-2, 3 का मतलब है कक्षा-3, 4 और 5, अगले 3 का मतलब है कक्षा6, 7 और 8 तथा अंतिम के 4 का मतलब है कक्षा-9, 10, 11 और 12। मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है। रमेश पोखरियाल निशंक अब देश के शिक्षा मंत्री हैं। बोर्ड परीक्षाओं में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन इन्हें ज्ञान आधारित बनाया जाएगा। लॉ और मेडिकल एजुकेशन को छोड़कर अन्य समस्त उच्च शिक्षा के लिए एकल निकाय के रूप में भारत उच्च शिक्षा आयोग यानि HECI का गठन किया जाएगा. अर्थात उच्च शिक्षा के लिए एक सिंगल रेगुलेटर रहेगा. नई शिक्षा नीति में रिपोर्ट कार्ड तैयार करने के तीन हिस्से होंगे. जिसमें पहले बच्चा अपने बारे में स्वयं मूल्यांकन करेगा, दूसरा उसके सहपाठियों से होगा और तीसरा अध्यापक के जरिए। अंडर ग्रेजुएट कोर्स को अब 3 की बजाए 4 साल का कर दिया गया है। छात्र अभी भी 3 साल बाद डिग्री हासिल कर पाएंगे, लेकिन 4 साल का कोर्स करने पर, सिर्फ 1 साल में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की जा सकेंगी. 3 साल की डिग्री उन छात्रों के लिए, जिन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं करना है. कक्षा छः से ही छात्रों को कोडिंग भी पढ़ाई जाएगी, जो कि स्कूली शिक्षा पूरी करने तक उनके कौशल विकास में सहायक होगी। इसके लिए इच्छुक छात्रों को छठवीं कक्षा के बाद से ही इंटर्नशिप करायी जाएगी. म्यूज़िक और आर्ट्स को पाठयक्रम में शामिल किया जायेगा। ग्रेजुएशन कोर्स के तीनों साल को प्रभावी बनाने हेतु उत्तम कदम उठाया गया है जिसके तहत 1 साल बाद सर्टिफिकेट, 2 साल बाद डिप्लोमा और 3 साल बाद डिग्री हासिल की जा सकेगी। ई-पाठ्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक टेक्नोलॉजी फोरम यानि NETF बनाया जा रहा है जिसके लिए वर्चुअल लैब विकसित की जा रहीं हैं। MPhil को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है, अब MA के बाद छात्र सीधे PhD कर पाएंगे। नई शिक्षा नीति में सबसे महत्वपूर्ण बिन्दु है मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम का लागू होना। इसके तहत 1 साल के बाद पढ़ाई छोडने पर सर्टिफिकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा और तीन-चार साल के बाद पढ़ाई छोडने के बाद डिग्री मिल जाएगी। नई शिक्षा नीति 2020 में प्राइवेट यूनिवर्सिटी और गवर्नमेंट यूनिवर्सिटी के नियम अब एक होंगे। देश में अनुसन्धान को बढ़ावा देने के लिए शीर्ष निकाय के रूप में नेशनल रिसर्च फ़ाउंडेशन (NRF) की स्थापना की जाएगी। यह स्वतंत्र रूप से सरकार के द्वारा, एक बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स द्वारा शासित होगा और बड़े प्रोजेक्टों की फाइनेंसिंग भी करेगा। नई नीति स्कूलों और एचईएस दोनों में बहुभाषावाद को बढ़ावा देती है. राष्ट्रीय पाली संस्थान, फारसी और प्राकृत, भारतीय अनुवाद संस्थान और व्याख्या की स्थापना की जाएगी।



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By  Public Reporter
posted : Tue/Oct 13, 2020, 02:23 AM - IST

New Delhi / यूजीसी की सजगता-... / दिल्ली, यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) ने बुधवार को देश के 24 फर्जी और गैर मान्यता प्राप्त संस्थानों की एक सूची जारी करते हुए इन संस्थानों को फर्जी करार दिया है। सूची के अनुसार इसमें सबसे ज्यादा फर्जी यूनिवर्सिटी उत्तर प्रदेश और उसके बाद राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में हैं।  यूजीसी के सचिव रजनीश जैन ने कहा कि वर्तमान में 24 फर्जी यूनिवर्सिटी और गैर मान्यता प्राप्त संस्थान यूजीसी कानून का उल्लंघन करते हुए चल रहे हैं। इन्हें फर्जी यूनिवर्सिटी/संस्थान घोषित किया गया है और इन्हें किसी भी तरह की कोई डिग्री प्रदान करने का अधिकार नहीं है। फर्जी विश्वविद्यालयों में उत्तर प्रदेश, राजधानी दिल्ली, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, पुडुचेरी और महाराष्ट्र।   उत्तर प्रदेश के फर्जी विश्वविद्यालय गांधी हिंदी विद्यापीठ, प्रयाग वारणसेय संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी महिला ग्राम विद्यापीठ/विश्वविद्यालय, प्रयाग उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय, कोसी कलां, मथुरा नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ इलेक्ट्रोकॉमप्लेक्स होम्योपैथी, कानपुर महाराणा प्रताप शिक्षा निकेतन विश्वविद्यालय, प्रतापगढ़ नेताजी सुभाष चंद्र बोस यूनिवर्सिटी (ओपन यूनिवर्सिटी), अलीगढ़ इंद्रप्रस्थ शिक्षा परिषद, इंस्टीट्यूशनल एरिया, माकनपुर, नोएडा   राजधानी दिल्ली के फर्जी विश्वविद्यालय वॉकेशनल यूनिवर्सिटी, दिल्ली कमर्शियल यूनिवर्सिटी लिमिटेड, दरियागंज आध्यात्मिक विश्वविद्यालय, रोहिणी विश्वकर्मा ओपन यूनिवर्सिटी फॉर सेल्फ एमप्लॉयमेंट, दिल्ली यूनाइटेड नेशन्स यूनिवर्सिटी, दिल्ली एडीआर-सेंट्रिक जूरीडीकल यूनिवर्सिटी, राजेंद्र प्लेस   पश्चिम बंगाल इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन, कोलकाता  इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन एंड रिसर्च, कोलकाता   केरल सेंट जॉन यूनिवर्सिटी कृष्णाटम, केरल   महाराष्ट्र राजा अरेबिक यूनिवर्सिटी, नागपुर   ओडिशा नॉर्थ ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, मयूरभंज नवभारत शिक्षा परिषद, राउरकेला   कर्नाटक बडागानवी सरकार वर्ल्ड ओपन यूनिवर्सिटी एजुकेशन सोसायटी, बेलगाम   पुडुचेरी श्री बोधि एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन    आंध्र प्रदेश क्राइस्ट न्यू टेस्टामेंट डीम्ड यूनिवर्सिटी, गुंटूर



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By  s verma
posted : Thu/Oct 15, 2020, 12:50 PM - IST

New Delhi / ट्यूशन फीस में कम... / पश्चिम बंगाल/कोलकाता, कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को 145 प्राइवेट स्कूलों को निर्देशित किया है कि उनके द्वारा ली जा रही ट्यूशन फीस को कम से कम 20 फीसदी की कटौती करें। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि ऑनलाइन कक्षाओं के चलते स्कूल उन सुविधाओं के लिए फीस नहीं ले सकते हैं जो छात्रों को नहीं मिल रही है। बता दें कि कोरोना महामारी के चलते कोलकाता के आसपास के 145 स्कूलों के छात्रों के अभिभावक स्कूल फीस में कटौती के लिए हाईकोर्ट में अर्जी डाली थी। कोर्ट ने अपने निर्देशों में कहा कि अप्रैल 2020 से लेकर स्कूल खुलने तक की अवधि के लिए फीस में कम से कम 20 फीसदी की कटौती किया जाना छत्रों के हित में होगा। साथ ही 2020-21 सत्र के फीस में भी बढ़ोत्तरी न करने का आदेश दिया गया। वित्तीय संकटों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने कहा कि विद्यालयों को इस ओर भी ध्यान देने की आवश्यकता है कि वह इस आपदा काल में फीस को कम करते हुए समाज को इस महामारी से लड़ने की ताकत देंगे। इस महामारी के कारण हर वर्ग वित्तीय संकटों का सामना कर रहा है। जिन अभिभावकों के द्वारा पहले ही फीस जमा कर दी गई थी, स्कूल प्रशासन उस अधिक दी गई राशि को आगे समायोजित करेगा।



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By  s verma
posted : Sat/Oct 31, 2020, 11:32 AM - IST

New Delhi / Education Materials... / Delhi: Realising the problems face by deaf children in pursuing education, the National Council of Educational Research and Training (NCERT) signed an agreement with the Indian Sign Language Research and Training Centre (ISLRTC) to prepare textbooks and other study materials in sign language. Availability of NCERT textbooks in Indian Sign Language (ISL) will enable the hearing-impaired children to access educational resources. Simultaneously, it will also prove a useful and much needed resource for teachers, teacher educators, parents and the hearing-impaired community. As per official sources, the cognitive skills of children are developed in the childhood and it is necessary to provide them with educational material in accordance with their learning needs. So far, hearing-impaired children used to study only through a verbal or written medium but after the signing of this MoU, they can study through a single Indian Sign Language also. It will not only enhance their vocabulary, but also enhance their capabilities to understand concepts. Indian Sign Language Research and Training Centre (ISLRTC) is an autonomous national institute of the social justice and empowerment ministry, which is dedicated to developing manpower for popularising the use of Indian Sign Language, teaching and conducting research.



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By  Public Reporter
posted : Tue/Feb 23, 2021, 11:03 AM - IST

Bilāspur / अटल बिहारी वाजपेयी... / छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में कुलपति के पद पर प्रो. अरण दिवाकर नाथ बाजपेयी (एडीएन बाजपेयी) की नियुक्ति की गई है। इसे लेकर सोमवार को राज्यपाल अनुसुईया उइके ने आदेश जारी किया है। अरण दिवाकर रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर (मध्य प्रदेश) में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। प्रोफेसर दिवाकर की नियुक्ति छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 (क्रमांक 22, सन 1973) की धारा 13 की उपधारा (1) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए की गई है। बाजपेयी का कार्यकाल, उपलब्धियां तथा सेवा शर्ते उक्त अधिनियम में वर्णित प्रावधान अनुसार होंगी। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में नए कुलपति की नियुक्ति को लेकर कई महीनों से प्रक्रिया जारी थी। इस दौरान राज्य के प्रमुख विश्वविद्यालयों सहित कॉलेज व यूटीडी से प्रोफेसरों की 84 अर्जी मिली थी। सोमवार को प्रो. बाजपेयी की नियुक्ति का आदेश जारी हो गया। प्रो. बाजपेयी इससे पहले अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा, महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय एवं हिमांचल प्रदेश विश्‍वविद्यालय, शिमला में दो बार कुलपति रह चुके हैं। उत्तरप्रदेश के शाहजहापुर में 21 सितंबर 1956 को दिवाकर नाथ का जन्म हुआ था। उनका मूल गाँव कलाम, जिला हरदोई उत्तर प्रदेश है। शाहजहापुर, पीलीभीत उत्तर प्रदेश के विभिन्न स्थानों और जिलों से उनकी स्कूली शिक्षा हुई । गोरखपुर विश्वविद्यालय, बहराइच उत्तर परदेश से बाजपेयी स्नातक है । प्रो. बाजपेयी  ने रादू विवि विश्वविद्यालय, जबलपुर से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर और डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी हासिल की है। वह वर्तमान में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में जबलपुर में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। बाजपेयी को कविता लेखन और योग पसंद है। इस अवसर पर रानी दुर्गावती विश्‍वविद्यालय, जबलपुर के कुलपति प्रो. कपिल देव मिश्र, प्रभारी कुलसचिव डॉ. दीपेश मिश्रा, प्रो. कमलेश मिश्रा, डॉ. लोकेश श्रीवास्तव एवं डॉ. आर के गुप्ता सहित विवि के प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों ने प्रो. बाजपेयी को हार्दिक बधाईयाँ  दीं।



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By  NIRAJ KUMAR...
posted : Tue/Mar 09, 2021, 08:58 AM - IST

Gaya / आने वाले वर्षों में... / दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय में नए सत्र (2020) में नामांकित छात्रो के स्वागत के लिए 09 मार्च को  विवेकानंद लेक्चर थिएटर में इंडक्शन प्रोग्राम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर हरिश चंद्र सिंह राठौर ने छात्रो का स्वागत किया और सम्बोधन किया। कुलपति ने कहा, " हमारा विश्वविद्यालय अपने 11वें वर्ष में ही देश के 48 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 26वां रैंक प्राप्त किया। यह बात सिद्ध करती है कि हम आने वाले वर्षों में देश के चुनिंदा विश्वविद्यालय में से एक होंगे। इसलिए जो भी छात्र देश के विभिन्न राज्यों से आये है, वो यहाँ के पढाई के गुणवत्ता को लेकर सुनिश्चित रहे।" विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रोफेसर आतिश पराशर ने छात्र कल्याण से जुड़ी सारी गतिविधियों और छात्रवृत्ति की जानकारी छात्रो की दी। साथ में उन्होंने कहा कि छात्रों के विकास के लिए छात्र कल्याण विभाग हमेशा प्रतिबद्ध है। विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर चीफ प्रोफेसर उमेश कुमार सिंह ने छात्रों को विश्वविद्यालय के अनुशासन और नियमों से अवगत कराया। शिक्षा विभाग के डीन प्रोफेसर कौशल किशोर ने छात्रों को चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम के बारे में छात्रों को समझाया और साथ में विश्वविद्यालय के परीक्षा पद्धति  से अवगत करवाया। कार्यक्रम के अंंत में डॉ कविता सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया.



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By  Newssyn Team
posted : Fri/Apr 09, 2021, 05:25 AM - IST

Mumbai / 8 राज्य- जहां बिना... / कोरोना की दूसरी लहर बोर्ड परीक्षाओं समेत अन्य तमाम परीक्षाओं पर बुरा साया बन रहा है। महाराष्ट्र, तमिलनाडु के साथ अनेक राज्यो में बिना परीक्षा के अगली कक्षाओं पे प्रमोट करने का फैसला किया है। अभी बोर्ड परीक्षा खासकर 12वी को लेकर किसी भी बोर्ड ने फैसला नही किया है। सीबीएससी, आईसीएसई समेत कई राज्य समते बोर्डों की परीक्षाएं सुरु होने में 22 से 25 दिन बाकी है।  किन राज्‍यों ने बिना परीक्षा किन कक्षओं को आगे प्रमोट करने का फैसला लिया है और कौन से राज्‍यों में कोरोना मरीजों के बढ़ने से परीक्षा टालने या रद्द करने की मांग तेज हुई है। महाराष्ट्र में कल तक 32,29,547 मामलों कु पृष्टि हुई है। यहा कोरोना का कहर देखते हुए महाराष्ट्र के राज्य शिक्षा मंर्ति वर्षा गायकवाड़ ने घोषणा की है कि राज्य में 9वी-11वी ने छात्र बैगेर परीक्षा के अगले क्लास में  प्रमोट किये जाएंगे शिक्षा बोर्ड के अनुसार covid-19 मामलो हो रही तेजी को देखते और मद्देनजर रहके हुए 9 और 11 अंतिम परीक्षा को रद्द कर दिया है। महाराष्ट्र के छात्रो को इस शैक्षणिक सत्र को 2021-22 के लिए प्रमोट किया गया HSC 12 वी  परीक्षाएं 23 अप्रेल से सुरु होने वाली है और कक्षा 10 वी की प्रैक्टिकल एग्जाम को रद्द कर दिया गया है। और covid-19  प्रभावित छात्रों की परीक्षा  में और जून में आयोजित की जाएंगी।  तमिलनाडु के सरकार ने एक माह पहिले ही फैसला ले लिया था की 9वी, 10वी, एवं 11वी की कक्षा के छात्र बिना परीक्षा के पास होंगे मुख्यमंत्री एडप्पादी पलानीस्वामी  ने विधानसभा में घोषणा की थी कि  2020-21 के शैक्षणिक वर्ष में इस कक्षाओं के लिए परीक्षा आयोजित नही होगी और छात्र सीधे पास कर दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था महामारी के कारण आई असामान्य स्थिति के चलते  शिक्षकों, अभिभावकों और छात्रों से  अनुरोध पर यह फैसला लिया गया  दिल्ली सरकार ने भी नर्सरी से लेकर 8वी के छात्रों को बिना किसी परीक्षा से अगली कक्षा में प्रमोट करने का फैसला लिया है। लेकिन कोरोना महामारी के बढ़ने से राज्य में अभीभावक 9वीं और 11वीं को भी प्रमोट करने की मांग कर रहे है। दिल्ली में कोरोना की बढ़ती रफ्तार को रोकने के लिए न नाईट कर्फ्यू लागू किया गया है।



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By  Newssyn Team
posted : Thu/Apr 15, 2021, 03:28 AM - IST

New Delhi / देश में कोरोना... / नई दिल्ली/बोर्ड परीक्षाएं 2021 कोरोना महामारी के कारण सीबीएसई ने अपनी बोर्ड परीक्षाएं स्थगित की है। जिसके बाद राजस्थान और हिमाचल प्रदेश ने भी राज्य में होने वाली बोर्ड परीक्षाएं रद्द करने की घोषणा की है। इससे पहले एमपी, पंजाब, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तमिलनाडु जैसे राज्य भी फैसला ले चुके है।  नई दिल्ली सीबीएसई बोर्ड ने देश मे हो रहे कोरोना संक्रमण को मद्देनजर रखते हुए 10वीं की परीक्षा रद्द और 12वीं के परीक्षा को लेकर फैसला 1 जून के बाद होगा। लेकिन कोरोना के कारण  परीक्षाओं के शेड्यूल में बदलाव  करने वाले सीबीएसई पहला बोर्ड नही है। कई राज्य बोर्ड्स ने छात्रों को राहत देते हुए ऐसे फैसले लिए है।  महाराष्ट्र बोर्ड (Maharashtra Board) महाराष्ट्र ने भी कोरोन संक्रमण के बेकाबू हालात के मद्देनजर 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। महाराष्ट्र की शिक्षा मंत्री वर्षा गायकवाड परीक्षाएं स्थगित करने की घोषणा करते हुए कहा था कि हम स्वास्थ्य की स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा था कि कक्षा 12वीं की परीक्षाएं मई के अंत तक आयोजित की जाएंगी, जबकि 10वीं कक्षा की परीक्षाएं जून में होंगी। इन परीक्षाओं के लिए नए सिरे से तारीखों की घोषणा की जाएगी।  पंजाब बोर्ड (Punjab Board) बोर्ड परीक्षाएं स्थगित करने वाला पंजाब पहला राज्य था। पंजाब ने 12वीं की बोर्ड परीक्षा एक बार फिर स्थगित कर दी है। नई डेट शीट के अनुसार यह 20 अप्रैल से शुरू होनी थी। इसका आखिरी पेपर 24 अप्रैल को होना था। जबकि 04 मई से शुरू होने वाली 10वीं की परीक्षा पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने कहा है कि 10वीं की परीक्षा पर भी अगले दो-तीन दिन के भीतर फैसला लिया जाएगा। तमिलनाडु बोर्ड (Tamil Nadu Board) तमिलनाडु अभी तक संभवत: एक मात्र राज्य है जिसने 10वीं की परीक्षा रद्द कर दी है।  यहां नौंवी और 11वीं कक्षा की तरह 10वीं के छात्रों को भी बिना परीक्षा के पास किया जाएगा। हालांकि 12वीं की परीक्षा तीन मई से शुरू हो रही है। अभी तक इसे रद्द करने या टालने पर विचार नहीं किया गया है। छत्तीसगढ़ बोर्ड (Chhattisgarh Board) छत्तीसगढ़ में कोरोना महामारी के कारण 10वीं की परीक्षाएं टाल दी गई हैं। पहले यह 15 अप्रैल से शुरू होने वाली थीं। इसकी अभी तक नई तिथि घोषित नहीं की गई है। जबकि 12वीं की परीक्षा अपने निर्धारित कार्यक्रम मके अनुसार तीन मई से शुरू होकर 24 मई को संपन्न होगी।



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By  Public Reporter
posted : Thu/Jun 03, 2021, 10:49 AM - IST

Delhi / इलाहाबाद... / दिल्ली / इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई पूरी कर चुके ऐसे बच्चों की आगे की शिक्षा का भार स्वयं वहन करने की घोषणा की है, जिनके माता-पिता का निधन कोरोना वायरस संक्रमण के कारण हो गया, ऐसे छात्र-छात्राएं अगर विश्वविद्यालय में अपना नामाकंन करवाते हैं तो उनकी पूरी फीस माफ की जाएगी। इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर संगीता श्रीवास्तव ने इस संबंध में प्रयागराज जिला प्रशासन को एक प्रस्ताव भेजा है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि कोरोना की दूसरी लहर ने लोगों के जीवन को बुरी तरह से प्रभावित किया है। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री एमके स्‍टालिन के परामर्श के बाद ये फैसला लिया गया है। विज्ञप्ति के मुताबिक, कोविड -19 से मरने वाले व्यक्तियों के बच्चों को 5 लाख रुपये दिए जाएंगे। बता दें कि 18 साल की आयु होने पर बच्‍चों को ब्‍याज सहित पूरी राशि दे दी जाएगी। इसके साथ ही उन बच्‍चों के नाम पर भी 5 लाख रुपये जमा किए जाएंगे जिन्होंने पहले ही अपने माता-पिता को खो दिया है। कुलपति  प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने जिला प्रशासन को एक प्रस्ताव भेजा है। इसने उन्होंने बताया कि, एक अनुमान के अनुसार करीब 9000 बच्चे अपने माता-पिता को खो चुके हैं। ऐसे विपरीत हालात में इन बच्चों के प्रति हम सबकी जिम्मेदारी काफी बढ़ जाती है।’ 



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By  s verma
posted : Thu/Oct 15, 2020, 12:50 PM - IST

New Delhi / ट्यूशन फीस में कम... / पश्चिम बंगाल/कोलकाता, कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को 145 प्राइवेट स्कूलों को निर्देशित किया है कि उनके द्वारा ली जा रही ट्यूशन फीस को कम से कम 20 फीसदी की कटौती करें। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि ऑनलाइन कक्षाओं के चलते स्कूल उन सुविधाओं के लिए फीस नहीं ले सकते हैं जो छात्रों को नहीं मिल रही है। बता दें कि कोरोना महामारी के चलते कोलकाता के आसपास के 145 स्कूलों के छात्रों के अभिभावक स्कूल फीस में कटौती के लिए हाईकोर्ट में अर्जी डाली थी। कोर्ट ने अपने निर्देशों में कहा कि अप्रैल 2020 से लेकर स्कूल खुलने तक की अवधि के लिए फीस में कम से कम 20 फीसदी की कटौती किया जाना छत्रों के हित में होगा। साथ ही 2020-21 सत्र के फीस में भी बढ़ोत्तरी न करने का आदेश दिया गया। वित्तीय संकटों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने कहा कि विद्यालयों को इस ओर भी ध्यान देने की आवश्यकता है कि वह इस आपदा काल में फीस को कम करते हुए समाज को इस महामारी से लड़ने की ताकत देंगे। इस महामारी के कारण हर वर्ग वित्तीय संकटों का सामना कर रहा है। जिन अभिभावकों के द्वारा पहले ही फीस जमा कर दी गई थी, स्कूल प्रशासन उस अधिक दी गई राशि को आगे समायोजित करेगा।



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By  Maahi Newser
posted : Thu/Aug 20, 2020, 09:56 AM - IST

New Delhi / जानिए नई शिक्षा... / नई शिक्षा नीति सरकार द्वारा शिक्षा को लेकर की जाने वाली नए बदलाओं से है जिसमें देश में शिक्षा को लेकर आने वाले समय को लेकर विज़न तैयार करना एवं उसे लागू करना है। जानकारों के अनुसार हर दस से पंद्रह साल में ऐसी नीति बनाई जानी चाहिए परंतु इस बार नई शिक्षा नीति को बनने में 34 साल लग गए। देश में सबसे पहली शिक्षा नीति सन 1968 में इंदिरा गांधी द्वारा शुरू की गई थी। भारत में नई शिक्षा नीति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट से मंजूरी 29 जुलाई, 2020 को मिली। इसमें पाँचवी तक की शिक्षा मातृभाषा में होगी। इस नई नीति में शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद का छः प्रतिशत भाग खर्च किया जाएगा। केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए साल 2030 तक का लक्ष्य रखा है। आइये जानते हैं नई शिक्षा नीति 2020 में शामिल मुख्य बिन्दुओं के बारे में- अब 1 से लेकर पाँचवी तक की शिक्षा स्थानीय भाषा या मात्रभाषा में होगी। इसमें अँग्रेजी, हिन्दी जैसी विषय शामिल होंगे परंतु पाठ्यक्रम स्थानीय भाषा या मातृभाषा में होंगे। नई शिक्षा नीति 2020 में सकल घरेलू उत्पाद का छः प्रतिशत खर्च किए जाएंगे जबकि यह पहले केवल 4.43 प्रतिशत थी। देश में चलने वाली 10+2 पद्धति में बदलाव होगा। नई नीति में ये 5+3+3+4 के हिसाब से होगा जिसमें 5 का मतलब है तीन साल प्री स्कूल और कक्षा-1 और कक्षा-2, 3 का मतलब है कक्षा-3, 4 और 5, अगले 3 का मतलब है कक्षा6, 7 और 8 तथा अंतिम के 4 का मतलब है कक्षा-9, 10, 11 और 12। मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है। रमेश पोखरियाल निशंक अब देश के शिक्षा मंत्री हैं। बोर्ड परीक्षाओं में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन इन्हें ज्ञान आधारित बनाया जाएगा। लॉ और मेडिकल एजुकेशन को छोड़कर अन्य समस्त उच्च शिक्षा के लिए एकल निकाय के रूप में भारत उच्च शिक्षा आयोग यानि HECI का गठन किया जाएगा. अर्थात उच्च शिक्षा के लिए एक सिंगल रेगुलेटर रहेगा. नई शिक्षा नीति में रिपोर्ट कार्ड तैयार करने के तीन हिस्से होंगे. जिसमें पहले बच्चा अपने बारे में स्वयं मूल्यांकन करेगा, दूसरा उसके सहपाठियों से होगा और तीसरा अध्यापक के जरिए। अंडर ग्रेजुएट कोर्स को अब 3 की बजाए 4 साल का कर दिया गया है। छात्र अभी भी 3 साल बाद डिग्री हासिल कर पाएंगे, लेकिन 4 साल का कोर्स करने पर, सिर्फ 1 साल में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की जा सकेंगी. 3 साल की डिग्री उन छात्रों के लिए, जिन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं करना है. कक्षा छः से ही छात्रों को कोडिंग भी पढ़ाई जाएगी, जो कि स्कूली शिक्षा पूरी करने तक उनके कौशल विकास में सहायक होगी। इसके लिए इच्छुक छात्रों को छठवीं कक्षा के बाद से ही इंटर्नशिप करायी जाएगी. म्यूज़िक और आर्ट्स को पाठयक्रम में शामिल किया जायेगा। ग्रेजुएशन कोर्स के तीनों साल को प्रभावी बनाने हेतु उत्तम कदम उठाया गया है जिसके तहत 1 साल बाद सर्टिफिकेट, 2 साल बाद डिप्लोमा और 3 साल बाद डिग्री हासिल की जा सकेगी। ई-पाठ्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक टेक्नोलॉजी फोरम यानि NETF बनाया जा रहा है जिसके लिए वर्चुअल लैब विकसित की जा रहीं हैं। MPhil को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है, अब MA के बाद छात्र सीधे PhD कर पाएंगे। नई शिक्षा नीति में सबसे महत्वपूर्ण बिन्दु है मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम का लागू होना। इसके तहत 1 साल के बाद पढ़ाई छोडने पर सर्टिफिकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा और तीन-चार साल के बाद पढ़ाई छोडने के बाद डिग्री मिल जाएगी। नई शिक्षा नीति 2020 में प्राइवेट यूनिवर्सिटी और गवर्नमेंट यूनिवर्सिटी के नियम अब एक होंगे। देश में अनुसन्धान को बढ़ावा देने के लिए शीर्ष निकाय के रूप में नेशनल रिसर्च फ़ाउंडेशन (NRF) की स्थापना की जाएगी। यह स्वतंत्र रूप से सरकार के द्वारा, एक बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स द्वारा शासित होगा और बड़े प्रोजेक्टों की फाइनेंसिंग भी करेगा। नई नीति स्कूलों और एचईएस दोनों में बहुभाषावाद को बढ़ावा देती है. राष्ट्रीय पाली संस्थान, फारसी और प्राकृत, भारतीय अनुवाद संस्थान और व्याख्या की स्थापना की जाएगी।



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By  Public Reporter
posted : Tue/Oct 13, 2020, 02:23 AM - IST

New Delhi / यूजीसी की सजगता-... / दिल्ली, यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) ने बुधवार को देश के 24 फर्जी और गैर मान्यता प्राप्त संस्थानों की एक सूची जारी करते हुए इन संस्थानों को फर्जी करार दिया है। सूची के अनुसार इसमें सबसे ज्यादा फर्जी यूनिवर्सिटी उत्तर प्रदेश और उसके बाद राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में हैं।  यूजीसी के सचिव रजनीश जैन ने कहा कि वर्तमान में 24 फर्जी यूनिवर्सिटी और गैर मान्यता प्राप्त संस्थान यूजीसी कानून का उल्लंघन करते हुए चल रहे हैं। इन्हें फर्जी यूनिवर्सिटी/संस्थान घोषित किया गया है और इन्हें किसी भी तरह की कोई डिग्री प्रदान करने का अधिकार नहीं है। फर्जी विश्वविद्यालयों में उत्तर प्रदेश, राजधानी दिल्ली, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, पुडुचेरी और महाराष्ट्र।   उत्तर प्रदेश के फर्जी विश्वविद्यालय गांधी हिंदी विद्यापीठ, प्रयाग वारणसेय संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी महिला ग्राम विद्यापीठ/विश्वविद्यालय, प्रयाग उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय, कोसी कलां, मथुरा नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ इलेक्ट्रोकॉमप्लेक्स होम्योपैथी, कानपुर महाराणा प्रताप शिक्षा निकेतन विश्वविद्यालय, प्रतापगढ़ नेताजी सुभाष चंद्र बोस यूनिवर्सिटी (ओपन यूनिवर्सिटी), अलीगढ़ इंद्रप्रस्थ शिक्षा परिषद, इंस्टीट्यूशनल एरिया, माकनपुर, नोएडा   राजधानी दिल्ली के फर्जी विश्वविद्यालय वॉकेशनल यूनिवर्सिटी, दिल्ली कमर्शियल यूनिवर्सिटी लिमिटेड, दरियागंज आध्यात्मिक विश्वविद्यालय, रोहिणी विश्वकर्मा ओपन यूनिवर्सिटी फॉर सेल्फ एमप्लॉयमेंट, दिल्ली यूनाइटेड नेशन्स यूनिवर्सिटी, दिल्ली एडीआर-सेंट्रिक जूरीडीकल यूनिवर्सिटी, राजेंद्र प्लेस   पश्चिम बंगाल इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन, कोलकाता  इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन एंड रिसर्च, कोलकाता   केरल सेंट जॉन यूनिवर्सिटी कृष्णाटम, केरल   महाराष्ट्र राजा अरेबिक यूनिवर्सिटी, नागपुर   ओडिशा नॉर्थ ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, मयूरभंज नवभारत शिक्षा परिषद, राउरकेला   कर्नाटक बडागानवी सरकार वर्ल्ड ओपन यूनिवर्सिटी एजुकेशन सोसायटी, बेलगाम   पुडुचेरी श्री बोधि एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन    आंध्र प्रदेश क्राइस्ट न्यू टेस्टामेंट डीम्ड यूनिवर्सिटी, गुंटूर



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By  Public Reporter
posted : Tue/Feb 23, 2021, 11:03 AM - IST

Bilāspur / अटल बिहारी वाजपेयी... / छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में कुलपति के पद पर प्रो. अरण दिवाकर नाथ बाजपेयी (एडीएन बाजपेयी) की नियुक्ति की गई है। इसे लेकर सोमवार को राज्यपाल अनुसुईया उइके ने आदेश जारी किया है। अरण दिवाकर रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर (मध्य प्रदेश) में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। प्रोफेसर दिवाकर की नियुक्ति छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 (क्रमांक 22, सन 1973) की धारा 13 की उपधारा (1) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए की गई है। बाजपेयी का कार्यकाल, उपलब्धियां तथा सेवा शर्ते उक्त अधिनियम में वर्णित प्रावधान अनुसार होंगी। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में नए कुलपति की नियुक्ति को लेकर कई महीनों से प्रक्रिया जारी थी। इस दौरान राज्य के प्रमुख विश्वविद्यालयों सहित कॉलेज व यूटीडी से प्रोफेसरों की 84 अर्जी मिली थी। सोमवार को प्रो. बाजपेयी की नियुक्ति का आदेश जारी हो गया। प्रो. बाजपेयी इससे पहले अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा, महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय एवं हिमांचल प्रदेश विश्‍वविद्यालय, शिमला में दो बार कुलपति रह चुके हैं। उत्तरप्रदेश के शाहजहापुर में 21 सितंबर 1956 को दिवाकर नाथ का जन्म हुआ था। उनका मूल गाँव कलाम, जिला हरदोई उत्तर प्रदेश है। शाहजहापुर, पीलीभीत उत्तर प्रदेश के विभिन्न स्थानों और जिलों से उनकी स्कूली शिक्षा हुई । गोरखपुर विश्वविद्यालय, बहराइच उत्तर परदेश से बाजपेयी स्नातक है । प्रो. बाजपेयी  ने रादू विवि विश्वविद्यालय, जबलपुर से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर और डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी हासिल की है। वह वर्तमान में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में जबलपुर में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। बाजपेयी को कविता लेखन और योग पसंद है। इस अवसर पर रानी दुर्गावती विश्‍वविद्यालय, जबलपुर के कुलपति प्रो. कपिल देव मिश्र, प्रभारी कुलसचिव डॉ. दीपेश मिश्रा, प्रो. कमलेश मिश्रा, डॉ. लोकेश श्रीवास्तव एवं डॉ. आर के गुप्ता सहित विवि के प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों ने प्रो. बाजपेयी को हार्दिक बधाईयाँ  दीं।



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By  NIRAJ KUMAR...
posted : Tue/Mar 09, 2021, 08:58 AM - IST

Gaya / आने वाले वर्षों में... / दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय में नए सत्र (2020) में नामांकित छात्रो के स्वागत के लिए 09 मार्च को  विवेकानंद लेक्चर थिएटर में इंडक्शन प्रोग्राम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर हरिश चंद्र सिंह राठौर ने छात्रो का स्वागत किया और सम्बोधन किया। कुलपति ने कहा, " हमारा विश्वविद्यालय अपने 11वें वर्ष में ही देश के 48 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 26वां रैंक प्राप्त किया। यह बात सिद्ध करती है कि हम आने वाले वर्षों में देश के चुनिंदा विश्वविद्यालय में से एक होंगे। इसलिए जो भी छात्र देश के विभिन्न राज्यों से आये है, वो यहाँ के पढाई के गुणवत्ता को लेकर सुनिश्चित रहे।" विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रोफेसर आतिश पराशर ने छात्र कल्याण से जुड़ी सारी गतिविधियों और छात्रवृत्ति की जानकारी छात्रो की दी। साथ में उन्होंने कहा कि छात्रों के विकास के लिए छात्र कल्याण विभाग हमेशा प्रतिबद्ध है। विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर चीफ प्रोफेसर उमेश कुमार सिंह ने छात्रों को विश्वविद्यालय के अनुशासन और नियमों से अवगत कराया। शिक्षा विभाग के डीन प्रोफेसर कौशल किशोर ने छात्रों को चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम के बारे में छात्रों को समझाया और साथ में विश्वविद्यालय के परीक्षा पद्धति  से अवगत करवाया। कार्यक्रम के अंंत में डॉ कविता सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया.



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By  Public Reporter
posted : Thu/Jun 03, 2021, 10:49 AM - IST

Delhi / इलाहाबाद... / दिल्ली / इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई पूरी कर चुके ऐसे बच्चों की आगे की शिक्षा का भार स्वयं वहन करने की घोषणा की है, जिनके माता-पिता का निधन कोरोना वायरस संक्रमण के कारण हो गया, ऐसे छात्र-छात्राएं अगर विश्वविद्यालय में अपना नामाकंन करवाते हैं तो उनकी पूरी फीस माफ की जाएगी। इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर संगीता श्रीवास्तव ने इस संबंध में प्रयागराज जिला प्रशासन को एक प्रस्ताव भेजा है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि कोरोना की दूसरी लहर ने लोगों के जीवन को बुरी तरह से प्रभावित किया है। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री एमके स्‍टालिन के परामर्श के बाद ये फैसला लिया गया है। विज्ञप्ति के मुताबिक, कोविड -19 से मरने वाले व्यक्तियों के बच्चों को 5 लाख रुपये दिए जाएंगे। बता दें कि 18 साल की आयु होने पर बच्‍चों को ब्‍याज सहित पूरी राशि दे दी जाएगी। इसके साथ ही उन बच्‍चों के नाम पर भी 5 लाख रुपये जमा किए जाएंगे जिन्होंने पहले ही अपने माता-पिता को खो दिया है। कुलपति  प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने जिला प्रशासन को एक प्रस्ताव भेजा है। इसने उन्होंने बताया कि, एक अनुमान के अनुसार करीब 9000 बच्चे अपने माता-पिता को खो चुके हैं। ऐसे विपरीत हालात में इन बच्चों के प्रति हम सबकी जिम्मेदारी काफी बढ़ जाती है।’ 



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By  Newssyn Team
posted : Fri/Apr 09, 2021, 05:25 AM - IST

Mumbai / 8 राज्य- जहां बिना... / कोरोना की दूसरी लहर बोर्ड परीक्षाओं समेत अन्य तमाम परीक्षाओं पर बुरा साया बन रहा है। महाराष्ट्र, तमिलनाडु के साथ अनेक राज्यो में बिना परीक्षा के अगली कक्षाओं पे प्रमोट करने का फैसला किया है। अभी बोर्ड परीक्षा खासकर 12वी को लेकर किसी भी बोर्ड ने फैसला नही किया है। सीबीएससी, आईसीएसई समेत कई राज्य समते बोर्डों की परीक्षाएं सुरु होने में 22 से 25 दिन बाकी है।  किन राज्‍यों ने बिना परीक्षा किन कक्षओं को आगे प्रमोट करने का फैसला लिया है और कौन से राज्‍यों में कोरोना मरीजों के बढ़ने से परीक्षा टालने या रद्द करने की मांग तेज हुई है। महाराष्ट्र में कल तक 32,29,547 मामलों कु पृष्टि हुई है। यहा कोरोना का कहर देखते हुए महाराष्ट्र के राज्य शिक्षा मंर्ति वर्षा गायकवाड़ ने घोषणा की है कि राज्य में 9वी-11वी ने छात्र बैगेर परीक्षा के अगले क्लास में  प्रमोट किये जाएंगे शिक्षा बोर्ड के अनुसार covid-19 मामलो हो रही तेजी को देखते और मद्देनजर रहके हुए 9 और 11 अंतिम परीक्षा को रद्द कर दिया है। महाराष्ट्र के छात्रो को इस शैक्षणिक सत्र को 2021-22 के लिए प्रमोट किया गया HSC 12 वी  परीक्षाएं 23 अप्रेल से सुरु होने वाली है और कक्षा 10 वी की प्रैक्टिकल एग्जाम को रद्द कर दिया गया है। और covid-19  प्रभावित छात्रों की परीक्षा  में और जून में आयोजित की जाएंगी।  तमिलनाडु के सरकार ने एक माह पहिले ही फैसला ले लिया था की 9वी, 10वी, एवं 11वी की कक्षा के छात्र बिना परीक्षा के पास होंगे मुख्यमंत्री एडप्पादी पलानीस्वामी  ने विधानसभा में घोषणा की थी कि  2020-21 के शैक्षणिक वर्ष में इस कक्षाओं के लिए परीक्षा आयोजित नही होगी और छात्र सीधे पास कर दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था महामारी के कारण आई असामान्य स्थिति के चलते  शिक्षकों, अभिभावकों और छात्रों से  अनुरोध पर यह फैसला लिया गया  दिल्ली सरकार ने भी नर्सरी से लेकर 8वी के छात्रों को बिना किसी परीक्षा से अगली कक्षा में प्रमोट करने का फैसला लिया है। लेकिन कोरोना महामारी के बढ़ने से राज्य में अभीभावक 9वीं और 11वीं को भी प्रमोट करने की मांग कर रहे है। दिल्ली में कोरोना की बढ़ती रफ्तार को रोकने के लिए न नाईट कर्फ्यू लागू किया गया है।



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By  Newssyn Team
posted : Thu/Apr 15, 2021, 03:28 AM - IST

New Delhi / देश में कोरोना... / नई दिल्ली/बोर्ड परीक्षाएं 2021 कोरोना महामारी के कारण सीबीएसई ने अपनी बोर्ड परीक्षाएं स्थगित की है। जिसके बाद राजस्थान और हिमाचल प्रदेश ने भी राज्य में होने वाली बोर्ड परीक्षाएं रद्द करने की घोषणा की है। इससे पहले एमपी, पंजाब, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तमिलनाडु जैसे राज्य भी फैसला ले चुके है।  नई दिल्ली सीबीएसई बोर्ड ने देश मे हो रहे कोरोना संक्रमण को मद्देनजर रखते हुए 10वीं की परीक्षा रद्द और 12वीं के परीक्षा को लेकर फैसला 1 जून के बाद होगा। लेकिन कोरोना के कारण  परीक्षाओं के शेड्यूल में बदलाव  करने वाले सीबीएसई पहला बोर्ड नही है। कई राज्य बोर्ड्स ने छात्रों को राहत देते हुए ऐसे फैसले लिए है।  महाराष्ट्र बोर्ड (Maharashtra Board) महाराष्ट्र ने भी कोरोन संक्रमण के बेकाबू हालात के मद्देनजर 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। महाराष्ट्र की शिक्षा मंत्री वर्षा गायकवाड परीक्षाएं स्थगित करने की घोषणा करते हुए कहा था कि हम स्वास्थ्य की स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा था कि कक्षा 12वीं की परीक्षाएं मई के अंत तक आयोजित की जाएंगी, जबकि 10वीं कक्षा की परीक्षाएं जून में होंगी। इन परीक्षाओं के लिए नए सिरे से तारीखों की घोषणा की जाएगी।  पंजाब बोर्ड (Punjab Board) बोर्ड परीक्षाएं स्थगित करने वाला पंजाब पहला राज्य था। पंजाब ने 12वीं की बोर्ड परीक्षा एक बार फिर स्थगित कर दी है। नई डेट शीट के अनुसार यह 20 अप्रैल से शुरू होनी थी। इसका आखिरी पेपर 24 अप्रैल को होना था। जबकि 04 मई से शुरू होने वाली 10वीं की परीक्षा पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने कहा है कि 10वीं की परीक्षा पर भी अगले दो-तीन दिन के भीतर फैसला लिया जाएगा। तमिलनाडु बोर्ड (Tamil Nadu Board) तमिलनाडु अभी तक संभवत: एक मात्र राज्य है जिसने 10वीं की परीक्षा रद्द कर दी है।  यहां नौंवी और 11वीं कक्षा की तरह 10वीं के छात्रों को भी बिना परीक्षा के पास किया जाएगा। हालांकि 12वीं की परीक्षा तीन मई से शुरू हो रही है। अभी तक इसे रद्द करने या टालने पर विचार नहीं किया गया है। छत्तीसगढ़ बोर्ड (Chhattisgarh Board) छत्तीसगढ़ में कोरोना महामारी के कारण 10वीं की परीक्षाएं टाल दी गई हैं। पहले यह 15 अप्रैल से शुरू होने वाली थीं। इसकी अभी तक नई तिथि घोषित नहीं की गई है। जबकि 12वीं की परीक्षा अपने निर्धारित कार्यक्रम मके अनुसार तीन मई से शुरू होकर 24 मई को संपन्न होगी।



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By  Maahi Newser
posted : Thu/Jan 01, 1970, 05:30 AM - IST

New Delhi / जानिए नई शिक्षा... / नई शिक्षा नीति सरकार द्वारा शिक्षा को लेकर की जाने वाली नए बदलाओं से है जिसमें देश में शिक्षा को लेकर आने वाले समय को लेकर विज़न तैयार करना एवं उसे लागू करना है। जानकारों के अनुसार हर दस से पंद्रह साल में ऐसी नीति बनाई जानी चाहिए परंतु इस बार नई शिक्षा नीति को बनने में 34 साल लग गए। देश में सबसे पहली शिक्षा नीति सन 1968 में इंदिरा गांधी द्वारा शुरू की गई थी। भारत में नई शिक्षा नीति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट से मंजूरी 29 जुलाई, 2020 को मिली। इसमें पाँचवी तक की शिक्षा मातृभाषा में होगी। इस नई नीति में शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद का छः प्रतिशत भाग खर्च किया जाएगा। केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए साल 2030 तक का लक्ष्य रखा है। आइये जानते हैं नई शिक्षा नीति 2020 में शामिल मुख्य बिन्दुओं के बारे में- अब 1 से लेकर पाँचवी तक की शिक्षा स्थानीय भाषा या मात्रभाषा में होगी। इसमें अँग्रेजी, हिन्दी जैसी विषय शामिल होंगे परंतु पाठ्यक्रम स्थानीय भाषा या मातृभाषा में होंगे। नई शिक्षा नीति 2020 में सकल घरेलू उत्पाद का छः प्रतिशत खर्च किए जाएंगे जबकि यह पहले केवल 4.43 प्रतिशत थी। देश में चलने वाली 10+2 पद्धति में बदलाव होगा। नई नीति में ये 5+3+3+4 के हिसाब से होगा जिसमें 5 का मतलब है तीन साल प्री स्कूल और कक्षा-1 और कक्षा-2, 3 का मतलब है कक्षा-3, 4 और 5, अगले 3 का मतलब है कक्षा6, 7 और 8 तथा अंतिम के 4 का मतलब है कक्षा-9, 10, 11 और 12। मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है। रमेश पोखरियाल निशंक अब देश के शिक्षा मंत्री हैं। बोर्ड परीक्षाओं में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन इन्हें ज्ञान आधारित बनाया जाएगा। लॉ और मेडिकल एजुकेशन को छोड़कर अन्य समस्त उच्च शिक्षा के लिए एकल निकाय के रूप में भारत उच्च शिक्षा आयोग यानि HECI का गठन किया जाएगा. अर्थात उच्च शिक्षा के लिए एक सिंगल रेगुलेटर रहेगा. नई शिक्षा नीति में रिपोर्ट कार्ड तैयार करने के तीन हिस्से होंगे. जिसमें पहले बच्चा अपने बारे में स्वयं मूल्यांकन करेगा, दूसरा उसके सहपाठियों से होगा और तीसरा अध्यापक के जरिए। अंडर ग्रेजुएट कोर्स को अब 3 की बजाए 4 साल का कर दिया गया है। छात्र अभी भी 3 साल बाद डिग्री हासिल कर पाएंगे, लेकिन 4 साल का कोर्स करने पर, सिर्फ 1 साल में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की जा सकेंगी. 3 साल की डिग्री उन छात्रों के लिए, जिन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं करना है. कक्षा छः से ही छात्रों को कोडिंग भी पढ़ाई जाएगी, जो कि स्कूली शिक्षा पूरी करने तक उनके कौशल विकास में सहायक होगी। इसके लिए इच्छुक छात्रों को छठवीं कक्षा के बाद से ही इंटर्नशिप करायी जाएगी. म्यूज़िक और आर्ट्स को पाठयक्रम में शामिल किया जायेगा। ग्रेजुएशन कोर्स के तीनों साल को प्रभावी बनाने हेतु उत्तम कदम उठाया गया है जिसके तहत 1 साल बाद सर्टिफिकेट, 2 साल बाद डिप्लोमा और 3 साल बाद डिग्री हासिल की जा सकेगी। ई-पाठ्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक टेक्नोलॉजी फोरम यानि NETF बनाया जा रहा है जिसके लिए वर्चुअल लैब विकसित की जा रहीं हैं। MPhil को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है, अब MA के बाद छात्र सीधे PhD कर पाएंगे। नई शिक्षा नीति में सबसे महत्वपूर्ण बिन्दु है मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम का लागू होना। इसके तहत 1 साल के बाद पढ़ाई छोडने पर सर्टिफिकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा और तीन-चार साल के बाद पढ़ाई छोडने के बाद डिग्री मिल जाएगी। नई शिक्षा नीति 2020 में प्राइवेट यूनिवर्सिटी और गवर्नमेंट यूनिवर्सिटी के नियम अब एक होंगे। देश में अनुसन्धान को बढ़ावा देने के लिए शीर्ष निकाय के रूप में नेशनल रिसर्च फ़ाउंडेशन (NRF) की स्थापना की जाएगी। यह स्वतंत्र रूप से सरकार के द्वारा, एक बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स द्वारा शासित होगा और बड़े प्रोजेक्टों की फाइनेंसिंग भी करेगा। नई नीति स्कूलों और एचईएस दोनों में बहुभाषावाद को बढ़ावा देती है. राष्ट्रीय पाली संस्थान, फारसी और प्राकृत, भारतीय अनुवाद संस्थान और व्याख्या की स्थापना की जाएगी।



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